हाईलाइट्स:
- 10 जून को बलौदाबाजार में एसपी और कलेक्ट्रेट कार्यालय में आगजनी की घटना।
- हिंसा में 12 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान, सैकड़ों गाड़ियां राख में तब्दील।
- कांग्रेस विधायक समेत 365 आरोपियों की गिरफ्तारी, पुलिस ने साजिश का खुलासा किया।
षड्यंत्र का खुलासा:
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह घटना अचानक घटी हुई नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस ने सिटी कोतवाली थाने में दर्ज 12 एफआईआर में से दो मामलों में क्रमशः 1,325 और 1,200 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है। पुलिस के अनुसार, इस घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।
गिरफ्तारियों का दौर:
पुलिस ने अब तक 365 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव भी शामिल हैं। यादव को 17 अगस्त को भिलाई से गिरफ्तार किया गया था, और उनकी रिमांड 3 सितंबर तक बढ़ाई गई है। कांग्रेस पार्टी ने उनकी गिरफ्तारी का कड़ा विरोध किया है, जबकि राज्य सरकार और पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना की पृष्ठभूमि:
इस हिंसा की जड़ें 15-16 मई की दरमियानी रात को बलौदाबाजार के महकोनी गांव में स्थित अमरगुफा में जैतखाम काटे जाने की घटना से जुड़ी हैं। इस घटना के बाद सतनामी समाज ने आक्रोश व्यक्त किया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद 10 जून को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एक सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें हिंसा भड़क उठी। सभा के बाद उग्र भीड़ ने एसपी और कलेक्टर कार्यालय में आग लगा दी और सैकड़ों गाड़ियां फूंक दी गईं। इस घटना में 12 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ।
न्यायिक जांच और आगे की कार्रवाई:
राज्य सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी है और कुछ लोगों ने सीबीआई जांच की भी मांग की है। बलौदाबाजार के एएसपी हेमसागर सिदार ने कहा कि इस मामले में अभी भी जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है। पुलिस सभी दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।