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पेरिस ओलिंपिक: एक खिलाड़ी कम, भारत ने रोमांचक मुकाबले में हॉकी सेमीफाइनल में प्रवेश किया

पेरिस: पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय हॉकी टीम ने एक यादगार प्रदर्शन के साथ सेमीफाइनल में जगह बना ली है। रविवार को हुए रोमांचक क्वार्टरफाइनल मुकाबले में, भारत ने ग्रेट ब्रिटेन को पेनल्टी शूट-आउट में 4-2 से हराया। इस जीत के साथ भारत ने लगातार दूसरी बार ओलंपिक सेमीफाइनल में प्रवेश किया है।

मुकाबले का नाटकीय मोड़
मैच की शुरुआत में ही भारतीय टीम एक खिलाड़ी कम हो गई थी। दूसरे क्वार्टर के दूसरे मिनट में, डिफेंडर अमित रोहिदास ने ब्रिटेन के खिलाड़ी विल कैलनन के साथ संघर्ष करते हुए अपनी छड़ी उठाई, जो ब्रिटेन के खिलाड़ी के सिर पर लगी। रेफरी ने वीडियो अंपायर से परामर्श करने के बाद रोहिदास को रेड कार्ड दिखाया। इस घटना के बाद भारत को मैच के अधिकांश समय के लिए एक खिलाड़ी कम के साथ खेलना पड़ा।

साहस और सामरिक कौशल का प्रदर्शन
भारतीय टीम ने अद्वितीय साहस और सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने रेड कार्ड मिलने के पांच मिनट बाद ही अपने ट्रेडमार्क ड्रैग-फ्लिक से भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। हाफ टाइम से पहले ग्रेट ब्रिटेन ने स्कोर बराबर कर दिया, लेकिन दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया और ब्रिटेन के हर आक्रमण को विफल कर दिया।

पेनल्टी शूट-आउट में जीत
60 मिनट के बाद स्कोर 1-1 पर बराबर था, जिससे मुकाबला पेनल्टी शूट-आउट में पहुंच गया। भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने दो प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के शॉट्स को रोकते हुए भारत को ड्राइवर की सीट पर ला दिया। ओलंपिक में पदार्पण कर रहे राज कुमार पाल ने निर्णायक गोल किया, जिससे भारत ने 4-2 से जीत हासिल की।

कोच और खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा, “जब से मैंने भारत के लिए खेलना शुरू किया है, तब से यह सबसे बड़ी जीत है।” कोच क्रेग फुल्टन ने भी भारतीय टीम की सराहना की और इसे हॉकी के मैदान पर बिताए गए सबसे कठिन 60 मिनटों में से एक बताया।

दिन की अन्य प्रतियोगिताएं
इस दिन भारत के निशानेबाज मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीते, जबकि बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन सेमीफाइनल में विक्टर एक्सेलसन से हार गए। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन भी अंतिम-8 चरण में हार गईं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
स्टेड यवेस-डु-मनोइर, जहां यह मुकाबला हुआ, का ओलंपिक इतिहास में एक विशेष स्थान है। 1924 के पेरिस ओलंपिक की 100 और 400 मीटर दौड़ को फिल्म चेरियट्स ऑफ फायर में अमर कर दिया गया था। अब, 100 साल बाद, इस स्थल ने एक और खेल महाकाव्य का साक्षी बनकर भारतीय हॉकी टीम के लिए एक नया अध्याय लिखा है।

  • खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
    उप कप्तान हार्दिक सिंह ने कहा, “आज, हमने उन सभी के लिए खेला जो मानते हैं कि हॉकी भारत की है।” मैच के बाद खिलाड़ी और दर्शक सभी उत्साह में थे। कोच फुल्टन ने अपनी बेटी से मिलकर एक खास क्षण का आनंद लिया, जो दर्शकों के बीच से उन्हें देख रही थी।

इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारतीय हॉकी टीम ने एक बार फिर अपने खेल कौशल और साहस का परिचय दिया है, और अब उनकी नजरें ओलंपिक पदक पर हैं।

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