रायपुर। छत्तीसगढ़ के पक्षी प्रेमियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा पहले जारी किए गए निर्देशों में संशोधन करते हुए वन विभाग ने घरों में पाले गए तोते और अन्य पक्षियों पर कार्रवाई के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसका मतलब है कि अब जिन घरों में तोते पाले गए हैं, वहां कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- घरों में पाले गए तोते और अन्य पक्षियों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं।
- प्रतिबंधित पक्षियों की अवैध बिक्री पर वन विभाग करेगा सख्त कार्रवाई।
- तकनीकी मार्गदर्शन के लिए वन विभाग लेगा नई दिल्ली से सहायता।
वन विभाग का संशोधित निर्देश: छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के कार्यालय द्वारा 23 अगस्त को जारी किए गए निर्देशों के तहत राज्य भर में तोते और अन्य संरक्षित पक्षियों की बिक्री और पालने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई थी। इस आदेश के बाद घरों में पक्षी पालने वालों में हड़कंप मच गया था।
हालांकि, नए निर्देश के अनुसार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) ने सभी मुख्य वन संरक्षक और वन मंडलाधिकारियों को एक पत्र भेजा है, जिसमें घरों में पाले गए पक्षियों पर तत्काल कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, वन विभाग नई दिल्ली से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करेगा ताकि इस मुद्दे पर आगे की दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।
अवैध बिक्री पर सख्ती: वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित संरक्षण प्राप्त वन पक्षियों की अवैध बिक्री पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले के आदेश में संशोधन: पूर्व में जारी आदेश के अनुसार, घरों में तोता और अन्य संरक्षित पक्षियों को रखने वालों को सात दिन के भीतर अपने नजदीकी वन कार्यालय या जू के अधिकारी से संपर्क कर पक्षियों को सुपुर्द करने का निर्देश दिया गया था। इस निर्देश का पालन न करने पर वन विभाग की उड़नदस्ता टीम द्वारा जब्ती और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, फिलहाल इस आदेश को स्थगित कर दिया गया है, जिससे पक्षी प्रेमियों को राहत मिली है।