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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: नकली होलोग्राम केस में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, ED को झटका

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े नकली होलोग्राम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के कासना पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है। इस फैसले से प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा झटका लगा है, जो इस मामले की जांच कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस आगस्टिन जार्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में याचिकाकर्ता विधु गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोरा द्वारा पेश तर्कों को सुनने के बाद यह रोक लगाई। गुप्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें हाईकोर्ट ने कासना पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की उनकी मांग को खारिज कर दिया था।

स्टे का प्रभाव:

विधि विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्टे के बाद कासना पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0196/2023 के तहत सभी प्रक्रियाएं अब रोक दी गई हैं। इसका सीधा मतलब है कि इस मामले में गिरफ्तार सभी अभियुक्तों को जमानत मिलने की संभावना बढ़ गई है। चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी है, इसलिए अब इस मामले में किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकेगी।

अनिल टुटेजा को मिली छत्तीसगढ़ वापस जाने की अनुमति:

इस बीच, शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को मेरठ कोर्ट से सशर्त छत्तीसगढ़ वापस भेजे जाने की अनुमति मिली है। मेरठ अदालत के विशेष न्यायाधीश (एसीबी) ने टुटेजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है कि अभियुक्त को इस न्यायालय में नियत तिथियों पर उपस्थित होने की शर्त पर छत्तीसगढ़ में उपस्थित रहने की अनुमति दी जाती है।

टुटेजा ने अपनी याचिका में यह अनुरोध किया था कि उन्हें रायपुर की विशेष न्यायालय द्वारा दी गई शर्तों के अनुसार मेरठ की बजाय रायपुर की हिरासत में वापस भेजा जाए। अदालत ने उनकी इस याचिका को स्वीकार कर लिया है।

इस फैसले से ED की जांच पर असर पड़ सकता है, और गिरफ्तार अभियुक्तों को राहत मिलने की संभावना है।

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