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अनुशासन और समय के सदुपयोग से हासिल होगा लक्ष्य । दासरथी चौहान

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिरदा के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा ग्राम पंचायत /ग्राम तरेकेला में शिविर २१ से प्रारम्भ द्वितीय दिवस सार्वजनिक स्थानों पर साफ -सफाई । मध्यान्ह भोजन के बाद बौद्धिक चर्चा में अपना दल एस के अनूसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी , छत्तीसगढ़ संयृक्त किसान मोर्चा के महासमुंद जिला सदस्य दासरथी चौहान ने स्वयं सेवी छात्र -छात्राओं से कहा कि इसका नाम ही सेवा योजना है ।सेवा सबसे कठिन कार्य है ।सेवक सुख चाहे तो सेवा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता । यहां इसी को सिखने आये हो । यहां आने का उद्देश्य पवित्र होना चाहिए।।इसके लिए बुद्ध से संबंधित एक कहानी प्रस्तुत किया। जिसमें ।स्रावस्ती में एक ब्राह्मण जिसका नाम वक्कली था ।वह दीक्षित हुआ और वह महिनों बुद्ध के सामने बैठ कर प्रवचन सुनता था।कभी फूल भेंट कर देता ।उसके बारे में भिक्षुओं ने बुद्ध से शिकायत करते हुए कहा कि वक्कली कुछ करता नहीं और बैठकर आपको देखते रहता है ।एक दिन बुद्ध ने वक्कली को बुलाया और कहा कि हे भिक्षु तुम बाहर -बाहर कब तक देखोगे ।और उसे संघ से निकाल दिया।तब वह दुःखी हो वहां से आत्मघात करने एक पर्वत से कुदना ही चाहा कि बुद्ध ने हाथ पकड़ लिया और उसे रोक लिया।और तबसे उस चोंटी को नृत्य चोंटी कहा जाता है । वक्कली खुश हो नाचा था ।यह कथा इसलिए कहा ताकि शिविर में केवल घुमने नहीं बल्कि यहां स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को एक उच्च स्तर पर ले जाये। वक्कली गलत उद्देश्य ले बुद्ध के पास गया ।जिसके पास गया वह बुद्ध सच्चा ।कभी -कभी ग़लत आदमी गलत कारण लेकर सच्चा आदमी के पास पहुंच जाता है । यह कथा मैंने मोरारी बापू से सुना है ।ऐसेही आप सभी स्वयं सेवी यहां आकर अनुशासन,सेवा और कर्तव्य बोध लेकर जाईये।तभी यहां आना सार्थक है।

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